श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.1.12

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सूत जानासि भद्रं ते भगवान् सात्वतां पतिः।

देवक्यां वसुदेवस्य जातो यस्य चिकीर्षया॥ १२

sūta jānāsi bhadraṃ te bhagavān sātvatāṃ patiḥ|

devakyāṃ vasudevasya jāto yasya cikīrṣayā|| 12

अर्थ

प्यारे सूतजी! आपका कल्याण हो। आप तो जानते ही हैं कि यदुवंशियोंके रक्षक भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण वसुदेवकी धर्मपत्नी देवकीके गर्भसे क्या करनेकी इच्छासे अवतीर्ण हुए थे॥ १२॥✎ 22

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #22 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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