प्यारे सूतजी! आपका कल्याण हो। आप तो जानते ही हैं कि यदुवंशियोंके रक्षक भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण वसुदेवकी धर्मपत्नी देवकीके गर्भसे क्या करनेकी इच्छासे अवतीर्ण हुए थे॥ १२॥✎ 22
सूत जानासि भद्रं ते भगवान् सात्वतां पतिः।
देवक्यां वसुदेवस्य जातो यस्य चिकीर्षया॥ १२
प्यारे सूतजी! आपका कल्याण हो। आप तो जानते ही हैं कि यदुवंशियोंके रक्षक भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण वसुदेवकी धर्मपत्नी देवकीके गर्भसे क्या करनेकी इच्छासे अवतीर्ण हुए थे॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.1.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 83) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/1/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)