श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.16

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

प्रासादशिखरारूढाः कुरुनार्यो दिदृक्षया।

ववृषुः कुसुमैः कृष्णं प्रेमव्रीडास्मितेक्षणाः॥ १६

prāsādaśikharārūḍhāḥ kurunāryo didṛkṣayā|

vavṛṣuḥ kusumaiḥ kṛṣṇaṃ premavrīḍāsmitekṣaṇāḥ|| 16

अर्थ

भगवान्‌के दर्शनकी लालसासे कुरुवंशकी स्त्रियाँ अटारियोंपर चढ़ गयीं और प्रेम, लज्जा एवं मुसकानसे युक्त चितवनसे भगवान्‌को देखती हुई उनपर पुष्पोंकी वर्षा करने लगीं॥ १६॥✎ 77 78

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #77 शब्दोंके बीचका स्थान: कोदेखती → को देखती
  • #78 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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