हस्तिनापुरकी स्त्रियाँ इस प्रकार बातचीत कर ही रही थीं कि भगवान् श्रीकृष्ण मन्द मुसकान और प्रेमपूर्ण चितवनसे उनका अभिनन्दन करते हुए वहाँसे विदा हो गये॥ ३१॥
एवंविधा गदन्तीनां स गिरः पुरयोषिताम्।
निरीक्षणेनाभिनन्दन् सस्मितेन ययौ हरिः॥ ३१
हस्तिनापुरकी स्त्रियाँ इस प्रकार बातचीत कर ही रही थीं कि भगवान् श्रीकृष्ण मन्द मुसकान और प्रेमपूर्ण चितवनसे उनका अभिनन्दन करते हुए वहाँसे विदा हो गये॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.10.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 129) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/10/31/