श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.34

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

कुरुजाङ्गलपाञ्चालान् शूरसेनान् सयामुनान्।

ब्रह्मावर्तं कुरुक्षेत्रं मत्स्यान् सारस्वतानथ॥ ३४

kurujāṅgalapāñcālān śūrasenān sayāmunān|

brahmāvartaṃ kurukṣetraṃ matsyān sārasvatānatha|| 34

अर्थ

शौनकजी! वे कुरुजांगल, पांचाल, शूरसेन, यमुनाके तटवर्ती प्रदेश ब्रह्मावर्त, कुरुक्षेत्र, मत्स्य, सारस्वत और मरुधन्व देशको पार करके सौवीर और आभीर देशके पश्चिम आनर्त देशमें आये। उस समय अधिक चलनेके कारण भगवान्‌के रथके घोड़े कुछ थक-से गये थे॥ ३४-३५॥

यह अर्थ श्लोक 34–35 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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