फिर जब उन्होंने राजा युधिष्ठिरसे द्वारका जानेकी अनुमति माँगी तब राजाने उन्हें अपने हृदयसे लगाकर स्वीकृति दे दी। भगवान् उनको प्रणाम करके रथपर सवार हुए। कुछ लोगों (समान उम्रवालों)-ने उनका आलिंगन किया और कुछ (छोटी उम्रवालों)-ने प्रणाम॥ ८॥✎ 7576
आमन्त्र्य चाभ्यनुज्ञातः परिष्वज्याभिवाद्य तम्।
आरुरोह रथं कैश्चित्परिष्वक्तोऽभिवादितः॥ ८
फिर जब उन्होंने राजा युधिष्ठिरसे द्वारका जानेकी अनुमति माँगी तब राजाने उन्हें अपने हृदयसे लगाकर स्वीकृति दे दी। भगवान् उनको प्रणाम करके रथपर सवार हुए। कुछ लोगों (समान उम्रवालों)-ने उनका आलिंगन किया और कुछ (छोटी उम्रवालों)-ने प्रणाम॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.10.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 126) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/10/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)