॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.11.14
सम्मार्जितमहामार्गरथ्यापणकचत्वराम्।
सिक्तां गन्धजलैरुप्तां फलपुष्पाक्षताङ्कुरैः॥ १४
sammārjitamahāmārgarathyāpaṇakacatvarām|
siktāṃ gandhajalairuptāṃ phalapuṣpākṣatāṅkuraiḥ|| 14
अर्थ
उसके राजमार्ग, अन्यान्य सड़कें, बाजार और चौक झाड़-बुहारकर सुगन्धित जलसे सींच दिये गये थे और भगवान्के स्वागतके लिये बरसाये हुए फल-फूल, अक्षत-अंकुर चारों ओर बिखरे हुए थे॥ १४॥✎ 79