tvaṃ sadgururnaḥ paramaṃ ca daivataṃ yasyānuvṛttyā kṛtino babhūvima|| 7
अर्थ
विश्वभावन! आप ही हमारे माता, सुहृद्, स्वामी और पिता हैं; आप ही हमारे सद्गुरु और परम आराध्यदेव हैं। आपके चरणोंकी सेवासे हम कृतार्थ हो रहे हैं। आप ही हमारा कल्याण करें॥ ७॥
भवाय नस्त्वं भव विश्वभावन त्वमेव माताथ सुहृत्पतिः पिता।
त्वं सद्गुरुर्नः परमं च दैवतं यस्यानुवृत्त्या कृतिनो बभूविम॥ ७
विश्वभावन! आप ही हमारे माता, सुहृद्, स्वामी और पिता हैं; आप ही हमारे सद्गुरु और परम आराध्यदेव हैं। आपके चरणोंकी सेवासे हम कृतार्थ हो रहे हैं। आप ही हमारा कल्याण करें॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.11.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 130) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/11/7/