धनुर्धरोंमें यह सहस्रबाहु अर्जुन और अपने दादा पार्थके समान अग्रगण्य होगा। यह अग्निके समान दुर्धर्ष और समुद्रके समान दुस्तर होगा॥ २१॥✎ 86
धन्विनामग्रणीरेष तुल्यश्चार्जुनयोर्द्वयोः।
हुताश इव दुर्धर्षः समुद्र इव दुस्तरः॥ २१
धनुर्धरोंमें यह सहस्रबाहु अर्जुन और अपने दादा पार्थके समान अग्रगण्य होगा। यह अग्निके समान दुर्धर्ष और समुद्रके समान दुस्तर होगा॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 137) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/12/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)