श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.30

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

स एष लोके विख्यातः परीक्षिदिति यत्प्रभुः।

गर्भे१ दृष्टमनुध्यायन् परीक्षेत नरेष्विह॥ ३०

sa eṣa loke vikhyātaḥ parīkṣiditi yatprabhuḥ|

garbhe dṛṣṭamanudhyāyan parīkṣeta nareṣviha|| 30

अर्थ

वही यह बालक संसारमें परीक्षित‍्के नामसे प्रसिद्ध हुआ; क्योंकि वह समर्थ बालक गर्भमें जिस पुरुषका दर्शन पा चुका था, उसका स्मरण करता हुआ लोगोंमें उसीकी परीक्षा करता रहता था कि देखें इनमेंसे कौन-सा वह है॥ ३०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—पूर्वदृष्ट०।

    (मुद्रित पृष्ठ 138)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें