श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.16

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

युधिष्ठिरो लब्धराज्यो दृष्ट्वा पौत्रं कुलंधरम्१।

भ्रातृभिर्लोकपालाभैर्मुमुदे परया श्रिया॥ १६

yudhiṣṭhiro labdharājyo dṛṣṭvā pautraṃ kulaṃdharam|

bhrātṛbhirlokapālābhairmumude parayā śriyā|| 16

अर्थ

राज्य प्राप्त हो जानेपर अपने लोकपालों-सरीखे भाइयोंके साथ राजा युधिष्ठिर वंशधर परीक्षित‍्को देखकर अपनी अतुल सम्पत्तिसे आनन्दित रहने लगे॥ १६॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—कुलोद्वहम्।

    (मुद्रित पृष्ठ 141)

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