श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.2

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

यावतः कृतवान् प्रश्नान् क्षत्ता कौषारवाग्रतः।

जातैकभक्तिर्गोविन्दे तेभ्यश्चोपरराम ह॥ २

yāvataḥ kṛtavān praśnān kṣattā kauṣāravāgrataḥ|

jātaikabhaktirgovinde tebhyaścopararāma ha|| 2

अर्थ

विदुरजीने मैत्रेय ऋषिसे जितने प्रश्न किये थे, उनका उत्तर सुननेके पहले ही श्रीकृष्णमें अनन्य भक्ति हो जानेके कारण वे उत्तर सुननेसे उपराम हो गये॥ २॥

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