श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.56

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

स वा अद्यतनाद् राजन् परतः पञ्चमेऽहनि।

कलेवरं हास्यति स्वं तच्च भस्मीभविष्यति॥ ५६

sa vā adyatanād rājan parataḥ pañcame'hani|

kalevaraṃ hāsyati svaṃ tacca bhasmībhaviṣyati|| 56

अर्थ

धर्मराज! आजसे पाँचवें दिन वे अपने शरीरका परित्याग कर देंगे और वह जलकर भस्म हो जायगा॥ ५६॥✎ 92

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #92 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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