जब वे भोजन एवं विश्राम करके सुखपूर्वक आसनपर बैठे थे तब युधिष्ठिरने विनयसे झुककर सबके सामने ही उनसे कहा॥ ७॥
तं भुक्तवन्तं विश्रान्तमासीनं सुखमासने।
प्रश्रयावनतो राजा प्राह तेषां च शृण्वताम्॥ ७
जब वे भोजन एवं विश्राम करके सुखपूर्वक आसनपर बैठे थे तब युधिष्ठिरने विनयसे झुककर सबके सामने ही उनसे कहा॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 139) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/13/7/