॥ श्रीहरिः ॥
कया वृत्त्या वर्तितं वश्चरद्भिः क्षितिमण्डलम्।
तीर्थानि क्षेत्रमुख्यानि सेवितानीह भूतले॥ ९
kayā vṛttyā vartitaṃ vaścaradbhiḥ kṣitimaṇḍalam|
tīrthāni kṣetramukhyāni sevitānīha bhūtale|| 9
अर्थ
आपने पृथ्वीपर विचरण करते समय किस वृत्तिसे जीवन-निर्वाह किया? आपने पृथ्वीतलपर किन-किन तीर्थों और मुख्य क्षेत्रोंका सेवन किया?॥ ९॥
कया वृत्त्या वर्तितं वश्चरद्भिः क्षितिमण्डलम्।
तीर्थानि क्षेत्रमुख्यानि सेवितानीह भूतले॥ ९
आपने पृथ्वीपर विचरण करते समय किस वृत्तिसे जीवन-निर्वाह किया? आपने पृथ्वीतलपर किन-किन तीर्थों और मुख्य क्षेत्रोंका सेवन किया?॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 140) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/13/9/