॥ श्रीहरिः ॥
सप्त स्वसारस्तत्पत्न्यो मातुलान्यः सहात्मजाः।
आसते सस्नुषाः क्षेमं देवकीप्रमुखाः स्वयम्॥ २७
sapta svasārastatpatnyo mātulānyaḥ sahātmajāḥ|
āsate sasnuṣāḥ kṣemaṃ devakīpramukhāḥ svayam|| 27
अर्थ
उनकी पत्नियाँ हमारी मामी देवकी आदि सातों बहिनें अपने पुत्रों और बहुओंके साथ आनन्दसे तो हैं?॥ २७॥
सप्त स्वसारस्तत्पत्न्यो मातुलान्यः सहात्मजाः।
आसते सस्नुषाः क्षेमं देवकीप्रमुखाः स्वयम्॥ २७
उनकी पत्नियाँ हमारी मामी देवकी आदि सातों बहिनें अपने पुत्रों और बहुओंके साथ आनन्दसे तो हैं?॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 148) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/27/