श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.30

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

प्रद्युम्नः सर्ववृष्णीनां सुखमास्ते महारथः।

गम्भीररयोऽनिरुद्धो वर्धते भगवानुत॥ ३०

pradyumnaḥ sarvavṛṣṇīnāṃ sukhamāste mahārathaḥ|

gambhīrarayo'niruddho vardhate bhagavānuta|| 30

अर्थ

वृष्णिवंशके सर्वश्रेष्ठ महारथी प्रद्युम्न सुखसे तो हैं? युद्धमें बड़ी फुर्ती दिखलानेवाले भगवान् अनिरुद्ध आनन्दसे हैं न?॥ ३०॥

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