कहीं तुमने अगम्या स्त्रीसे समागम तो नहीं किया? अथवा गमन करनेयोग्य स्त्रीके साथ असत्कारपूर्वक समागम तो नहीं किया? कहीं मार्गमें अपनेसे छोटे अथवा बराबरीवालोंसे हार तो नहीं गये?॥ ४२॥✎ 1859
कच्चित्त्वं नागमोऽगम्यां गम्यां वासत्कृतां स्त्रियम्।
पराजितो वाथ भवान्नोत्तमैर्नासमैः पथि॥ ४२
कहीं तुमने अगम्या स्त्रीसे समागम तो नहीं किया? अथवा गमन करनेयोग्य स्त्रीके साथ असत्कारपूर्वक समागम तो नहीं किया? कहीं मार्गमें अपनेसे छोटे अथवा बराबरीवालोंसे हार तो नहीं गये?॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 150) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/42/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)