कहीं देवर्षि नारदके द्वारा बतलाया हुआ वह समय तो नहीं आ पहुँचा है, जिसमें भगवान् श्रीकृष्ण अपने लीला-विग्रहका संवरण करना चाहते हैं?॥ ८॥✎ 93
अपि देवर्षिणाऽऽदिष्टः स कालोऽयमुपस्थितः।
यदाऽऽत्मनोऽङ्गमाक्रीडं भगवानुत्सिसृक्षति॥ ८
कहीं देवर्षि नारदके द्वारा बतलाया हुआ वह समय तो नहीं आ पहुँचा है, जिसमें भगवान् श्रीकृष्ण अपने लीला-विग्रहका संवरण करना चाहते हैं?॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 146) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)