जो लोग उन्हें ये चरित्र सुनाते, उनपर महामना राजा परीक्षित् बहुत प्रसन्न होते; उनके नेत्र प्रेमसे खिल उठते। वे बड़ी उदारतासे उन्हें बहुमूल्य वस्त्र और मणियोंके हार उपहाररूपमें देते॥ १५॥
तेभ्यः परमसंतुष्टः प्रीत्युज्जृम्भितलोचनः।
महाधनानि वासांसि ददौ हारान् महामनाः॥ १५
जो लोग उन्हें ये चरित्र सुनाते, उनपर महामना राजा परीक्षित् बहुत प्रसन्न होते; उनके नेत्र प्रेमसे खिल उठते। वे बड़ी उदारतासे उन्हें बहुमूल्य वस्त्र और मणियोंके हार उपहाररूपमें देते॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.16.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 159) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/16/15/