श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.15

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तेभ्यः परमसंतुष्टः प्रीत्युज्जृम्भितलोचनः।

महाधनानि वासांसि ददौ हारान् महामनाः॥ १५

tebhyaḥ paramasaṃtuṣṭaḥ prītyujjṛmbhitalocanaḥ|

mahādhanāni vāsāṃsi dadau hārān mahāmanāḥ|| 15

अर्थ

जो लोग उन्हें ये चरित्र सुनाते, उनपर महामना राजा परीक्षित् बहुत प्रसन्‍न होते; उनके नेत्र प्रेमसे खिल उठते। वे बड़ी उदारतासे उन्हें बहुमूल्य वस्त्र और मणियोंके हार उपहाररूपमें देते॥ १५॥

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