श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.16.24

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

इदं ममाचक्ष्व तवाधिमूलं

वसुन्धरे येन विकर्शितासि।

कालेन वा ते बलिनां बलीयसा

सुरार्चितं किं हृतमम्ब सौभगम्॥ २४

idaṃ mamācakṣva tavādhimūlaṃ

vasundhare yena vikarśitāsi|

kālena vā te balināṃ balīyasā

surārcitaṃ kiṃ hṛtamamba saubhagam|| 24

अर्थ

देवि! तुम तो धन-रत्नोंकी खान हो। तुम अपने क्लेशका कारण, जिससे तुम इतनी दुर्बल हो गयी हो, मुझे बतलाओ। मालूम होता है, बड़े-बड़े बलवानोंको भी हरा देनेवाले कालने देवताओंके द्वारा वन्दनीय तुम्हारे सौभाग्यको छीन लिया है॥ २४॥

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