बिना आपत्तिकालके मर्यादाका उल्लंघन करनेवालोंको शास्त्रानुसार दण्ड देते हुए अपने धर्ममें स्थित लोगोंका पालन करना राजाओंका परम धर्म है॥ १६॥
राज्ञो हि परमो धर्मः स्वधर्मस्थानुपालनम्।
शासतोऽन्यान् यथाशास्त्रमनापद्युत्पथानिह॥ १६
बिना आपत्तिकालके मर्यादाका उल्लंघन करनेवालोंको शास्त्रानुसार दण्ड देते हुए अपने धर्ममें स्थित लोगोंका पालन करना राजाओंका परम धर्म है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.17.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 164) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/17/16/