श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.16

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

राज्ञो हि परमो धर्मः स्वधर्मस्थानुपालनम्।

शासतोऽन्यान् यथाशास्त्रमनापद्युत्पथानिह॥ १६

rājño hi paramo dharmaḥ svadharmasthānupālanam|

śāsato'nyān yathāśāstramanāpadyutpathāniha|| 16

अर्थ

बिना आपत्तिकालके मर्यादाका उल्लंघन करनेवालोंको शास्त्रानुसार दण्ड देते हुए अपने धर्ममें स्थित लोगोंका पालन करना राजाओंका परम धर्म है॥ १६॥

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