॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.17.19
केचिद् विकल्पवसना आहुरात्मानमात्मनः।
दैवमन्ये परे कर्म स्वभावमपरे प्रभुम्॥ १९
kecid vikalpavasanā āhurātmānamātmanaḥ|
daivamanye pare karma svabhāvamapare prabhum|| 19
अर्थ
जो लोग किसी भी प्रकारके द्वैतको स्वीकार नहीं करते, वे अपने-आपको ही अपने दुःखका कारण बतलाते हैं। कोई प्रारब्धको कारण बतलाते हैं, तो कोई कर्मको। कुछ लोग स्वभावको, तो कुछ लोग ईश्वरको दुःखका कारण मानते हैं॥ १९॥