श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.17.19

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

केचिद् विकल्पवसना आहुरात्मानमात्मनः।

दैवमन्ये परे कर्म स्वभावमपरे प्रभुम्॥ १९

kecid vikalpavasanā āhurātmānamātmanaḥ|

daivamanye pare karma svabhāvamapare prabhum|| 19

अर्थ

जो लोग किसी भी प्रकारके द्वैतको स्वीकार नहीं करते, वे अपने-आपको ही अपने दुःखका कारण बतलाते हैं। कोई प्रारब्धको कारण बतलाते हैं, तो कोई कर्मको। कुछ लोग स्वभावको, तो कुछ लोग ईश्‍वरको दुःखका कारण मानते हैं॥ १९॥

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