वह कमलतन्तुके समान श्वेत रंगका बैल एक पैरसे खड़ा काँप रहा था तथा शूद्रकी ताड़नासे पीड़ित और भयभीत होकर मूत्र-त्याग कर रहा था॥ २॥
वृषं मृणालधवलं मेहन्तमिव बिभ्यतम्।
वेपमानं पदैकेन सीदन्तं शूद्रताडितम्॥ २
वह कमलतन्तुके समान श्वेत रंगका बैल एक पैरसे खड़ा काँप रहा था तथा शूद्रकी ताड़नासे पीड़ित और भयभीत होकर मूत्र-त्याग कर रहा था॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.17.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 163) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/17/2/