श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.25

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

जलाशयमचक्षाणः प्रविवेश तमाश्रमम्।

ददर्श मुनिमासीनं शान्तं मीलितलोचनम्॥ २५

jalāśayamacakṣāṇaḥ praviveśa tamāśramam|

dadarśa munimāsīnaṃ śāntaṃ mīlitalocanam|| 25

अर्थ

जब कहीं उन्हें कोई जलाशय नहीं मिला, तब वे पासके ही एक ऋषिके आश्रममें घुस गये। उन्होंने देखा कि वहाँ आँखें बंद करके शान्तभावसे एक मुनि आसनपर बैठे हुए हैं॥ २५॥

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