श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.32

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तस्य पुत्रोऽतितेजस्वी विहरन् बालकोऽर्भकैः।

राज्ञाघं प्रापितं तातं श्रुत्वा तत्रेदमब्रवीत्॥ ३२

tasya putro'titejasvī viharan bālako'rbhakaiḥ|

rājñāghaṃ prāpitaṃ tātaṃ śrutvā tatredamabravīt|| 32

अर्थ

उन शमीक मुनिका पुत्र बड़ा तेजस्वी था। वह दूसरे ऋषिकुमारोंके साथ पास ही खेल रहा था। जब उस बालकने सुना कि राजाने मेरे पिताके साथ दुर्व्यवहार किया है, तब वह इस प्रकार कहने लगा—॥ ३२॥

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