श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.43

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अलक्ष्यमाणे नरदेवनाम्नि

रथाङ्गपाणावयमङ्ग लोकः।

तदा हि चौरप्रचुरो विनङ्क्ष्य-

त्यरक्ष्यमाणोऽविवरूथवत् क्षणात्॥ ४३

alakṣyamāṇe naradevanāmni

rathāṅgapāṇāvayamaṅga lokaḥ|

tadā hi caurapracuro vinaṅkṣya-

tyarakṣyamāṇo'vivarūthavat kṣaṇāt|| 43

अर्थ

जिस समय राजाका रूप धारण करके भगवान् पृथ्वीपर नहीं दिखायी देंगे, उस समय चोर बढ़ जायँगे और अरक्षित भेड़ोंके समान एक क्षणमें ही लोगोंका नाश हो जायगा ॥ ४३॥

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