श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.18.9

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

उपवर्णितमेतद् वः३ पुण्यं पारीक्षितं मया।

वासुदेवकथोपेतमाख्यानं यदपृच्छत॥ ९

upavarṇitametad vaḥ puṇyaṃ pārīkṣitaṃ mayā|

vāsudevakathopetamākhyānaṃ yadapṛcchata|| 9

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! आपलोगोंको मैंने भगवान्‌की कथासे युक्त राजा परीक्षित‍्का पवित्र चरित्र सुनाया। आपलोगोंने यही पूछा था॥ ९॥✎ 109

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—मेतद्धि।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 169)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #109 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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