॥ श्रीहरिः ॥
सर्वे वयं तावदिहास्महेऽद्य
कलेवरं यावदसौ विहाय।
लोकं परं विरजस्कं विशोकं
यास्यत्ययं भागवतप्रधानः॥ २१
sarve vayaṃ tāvadihāsmahe'dya
kalevaraṃ yāvadasau vihāya|
lokaṃ paraṃ virajaskaṃ viśokaṃ
yāsyatyayaṃ bhāgavatapradhānaḥ|| 21
अर्थ
हम सब तबतक यहीं रहेंगे, जबतक ये भगवान्के परम भक्त परीक्षित् अपने नश्वर शरीरको छोड़कर मायादोष एवं शोकसे रहित भगवद्धाममें नहीं चले जाते’॥ २१॥
सर्वे वयं तावदिहास्महेऽद्य
कलेवरं यावदसौ विहाय।
लोकं परं विरजस्कं विशोकं
यास्यत्ययं भागवतप्रधानः॥ २१
हम सब तबतक यहीं रहेंगे, जबतक ये भगवान्के परम भक्त परीक्षित् अपने नश्वर शरीरको छोड़कर मायादोष एवं शोकसे रहित भगवद्धाममें नहीं चले जाते’॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.19.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 177) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/19/21/