श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.3

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

अद्यैव राज्यं बल३मृद्धकोशं

प्रकोपितब्रह्मकुलानलो मे।

दहत्वभद्रस्य पुनर्न मेऽभूत्४

पापीयसी धीर्द्विजदेवगोभ्यः॥ ३

adyaiva rājyaṃ balamṛddhakośaṃ

prakopitabrahmakulānalo me|

dahatvabhadrasya punarna me'bhūt

pāpīyasī dhīrdvijadevagobhyaḥ|| 3

अर्थ

ब्राह्मणोंकी क्रोधाग्‍नि आज ही मेरे राज्य, सेना और भरे-पूरे खजानेको जलाकर खाक कर दे—जिससे फिर कभी मुझ दुष्टकी ब्राह्मण, देवता और गौओंके प्रति ऐसी पापबुद्धि न हो॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—बलमूर्ज०।

    (मुद्रित पृष्ठ 174)
  2. ४

    प्रा० पा०—मेऽस्तु।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 174)

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