श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.40

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

सूत उवाच

एवमाभाषितः पृष्टः स राज्ञा श्लक्ष्णया गिरा।

प्रत्यभाषत धर्मज्ञो भगवान् बादरायणिः॥ ४०

evamābhāṣitaḥ pṛṣṭaḥ sa rājñā ślakṣṇayā girā|

pratyabhāṣata dharmajño bhagavān bādarāyaṇiḥ|| 40

अर्थ

सूतजी कहते हैं—जब राजाने बड़ी ही मधुर वाणीमें इस प्रकार सम्भाषण एवं प्रश्न किये, तब समस्त धर्मोंके मर्मज्ञ व्यासनन्दन भगवान् श्रीशुकदेवजी उनका उत्तर देने लगे॥ ४०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे वैयासिक्यामष्टादशसाहस्र्यां पारमहंस्यां संहितायां
प्रथमस्कन्धे शुकागमनं नामैकोनविंशोऽध्यायः॥ १९॥

॥ इति प्रथमः स्कन्धः समाप्तः॥

॥ हरिः ॐ तत्सत्॥

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