तब रजोगुण और तमोगुणके भाव—काम और लोभादि शान्त हो जाते हैं और चित्त इनसे रहित होकर सत्त्वगुणमें स्थित एवं निर्मल हो जाता है॥ १९॥✎ 27
तदा रजस्तमोभावाः कामलोभादयश्च ये।
चेत एतैरनाविद्धं स्थितं सत्त्वे प्रसीदति॥ १९
तब रजोगुण और तमोगुणके भाव—काम और लोभादि शान्त हो जाते हैं और चित्त इनसे रहित होकर सत्त्वगुणमें स्थित एवं निर्मल हो जाता है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.2.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 86) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/2/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)