श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.2.19

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तदा रजस्तमोभावाः कामलोभादयश्‍च ये।

चेत एतैरनाविद्धं स्थितं सत्त्वे प्रसीदति॥ १९

tadā rajastamobhāvāḥ kāmalobhādayaśca ye|

ceta etairanāviddhaṃ sthitaṃ sattve prasīdati|| 19

अर्थ

तब रजोगुण और तमोगुणके भाव—काम और लोभादि शान्त हो जाते हैं और चित्त इनसे रहित होकर सत्त्वगुणमें स्थित एवं निर्मल हो जाता है॥ १९॥✎ 27

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #27 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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