राजा नाभिकी पत्नी मेरु देवीके गर्भसे ऋषभदेवके रूपमें भगवान्ने आठवाँ अवतार ग्रहण किया। इस रूपमें उन्होंने परमहंसोंका वह मार्ग, जो सभी आश्रमियोंके लिये वन्दनीय है, दिखाया॥ १३॥✎ 3031
अष्टमे मेरुदेव्यां तु नाभेर्जात उरुक्रमः।
दर्शयन् वर्त्म धीराणां सर्वाश्रमनमस्कृतम्॥ १३
राजा नाभिकी पत्नी मेरु देवीके गर्भसे ऋषभदेवके रूपमें भगवान्ने आठवाँ अवतार ग्रहण किया। इस रूपमें उन्होंने परमहंसोंका वह मार्ग, जो सभी आश्रमियोंके लिये वन्दनीय है, दिखाया॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 90) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/3/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)