॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.3.27
ऋषयो मनवो देवा मनुपुत्रा महौजसः।
कलाः सर्वे हरेरेव सप्रजापतयस्तथा॥ २७
ṛṣayo manavo devā manuputrā mahaujasaḥ|
kalāḥ sarve harereva saprajāpatayastathā|| 27
अर्थ
ऋषि, मनु, देवता, प्रजापति, मनुपुत्र और जितने भी महान् शक्तिशाली हैं, वे सब-के-सब भगवान्के ही अंश हैं॥ २७॥