श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.3.35

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एवं जन्मानि कर्माणि ह्यकर्तुरजनस्य च।

वर्णयन्ति स्म कवयो वेदगुह्यानि हृत्पतेः॥ ३५

evaṃ janmāni karmāṇi hyakarturajanasya ca|

varṇayanti sma kavayo vedaguhyāni hṛtpateḥ|| 35

अर्थ

वास्तवमें जिनके जन्म नहीं हैं और कर्म भी नहीं हैं, उन हृदयेश्‍वर भगवान्‌के अप्राकृत जन्म और कर्मोंका तत्त्वज्ञानी लोग इसी प्रकार वर्णन करते हैं; क्योंकि उनके जन्म और कर्म वेदोंके अत्यन्त गोपनीय रहस्य हैं॥ ३५॥

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