इसी प्रकार यद्यपि सभी कर्म मनुष्योंको जन्म-मृत्युरूप संसारके चक्रमें डालनेवाले हैं, तथापि जब वे भगवान्को समर्पित कर दिये जाते हैं, तब उनका कर्मपना ही नष्ट हो जाता है॥ ३४॥✎ 505152
एवं नृणां क्रियायोगाः सर्वे संसृतिहेतवः।
त एवात्मविनाशाय कल्पन्ते कल्पिताः परे॥ ३४
इसी प्रकार यद्यपि सभी कर्म मनुष्योंको जन्म-मृत्युरूप संसारके चक्रमें डालनेवाले हैं, तथापि जब वे भगवान्को समर्पित कर दिये जाते हैं, तब उनका कर्मपना ही नष्ट हो जाता है॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 101) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/5/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)