श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.5.36

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

कुर्वाणा यत्र कर्माणि भगवच्छिक्षयासकृत्।

गृणन्ति गुणनामानि कृष्णस्यानुस्मरन्ति च॥ ३६

kurvāṇā yatra karmāṇi bhagavacchikṣayāsakṛt|

gṛṇanti guṇanāmāni kṛṣṇasyānusmaranti ca|| 36

अर्थ

उस भगवदर्थ कर्मके मार्गमें भगवान्‌के आज्ञानुसार आचरण करते हुए लोग बार-बार भगवान् श्रीकृष्णके गुण और नामोंका कीर्तन तथा स्मरण करते हैं॥ ३६॥✎ 50 51 52

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #50 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #51 शब्दोंके बीचका स्थान: कोसमर्पित → को समर्पित
  • #52 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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