श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.6.4

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

प्राक्कल्पविषयामेतां स्मृतिं ते सुरसत्तम।

न ह्येष व्यवधात्काल एष सर्वनिराकृतिः॥ ४

prākkalpaviṣayāmetāṃ smṛtiṃ te surasattama|

na hyeṣa vyavadhātkāla eṣa sarvanirākṛtiḥ|| 4

अर्थ

देवर्षे! काल तो सभी वस्तुओंको नष्ट कर देता है, उसने आपकी इस पूर्वकल्पकी स्मृतिका कैसे नाश नहीं किया?॥ ४॥

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