श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.22

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अर्जुन उवाच✎ 1282

कृष्ण कृष्ण महाबाहो१ भक्तानामभयङ्कर।

त्वमेको दह्यमानानामपवर्गोऽसि संसृतेः॥ २२

kṛṣṇa kṛṣṇa mahābāho bhaktānāmabhayaṅkara|

tvameko dahyamānānāmapavargo'si saṃsṛteḥ|| 22

अर्थ

अर्जुनने कहा—श्रीकृष्ण! तुम सच्चिदानन्द-स्वरूप परमात्मा हो। तुम्हारी शक्ति अनन्त है। तुम्हीं भक्तोंको अभय देनेवाले हो। जो संसारकी धधकती हुई आगमें जल रहे हैं, उन जीवोंको उससे उबारनेवाले एकमात्र तुम्हीं हो॥ २२॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—महाभाग।

    (मुद्रित पृष्ठ 109)

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