श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.11

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सूत उवाच

उपधार्य वचस्तस्या भगवान् भक्तवत्सलः।

अपाण्डवमिदं कर्तुं द्रौणेरस्त्रमबुध्यत॥ ११

upadhārya vacastasyā bhagavān bhaktavatsalaḥ|

apāṇḍavamidaṃ kartuṃ drauṇerastramabudhyata|| 11

अर्थ

सूतजी कहते हैं—भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण उसकी बात सुनते ही जान गये कि अश्‍वत्थामाने पाण्डवोंके वंशको निर्बीज करनेके लिये ब्रह्मास्त्रका प्रयोग किया है॥ ११॥

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