उन्होंने कुन्तीसे कह दिया—‘अच्छा ठीक है’ और रथके स्थानसे वे हस्तिनापुर लौट आये। वहाँ कुन्ती और सुभद्रा आदि देवियोंसे विदा लेकर जब वे जाने लगे, तब राजा युधिष्ठिरने बड़े प्रेमसे उन्हें रोक लिया॥ ४५॥✎ 7071
तां बाढमित्युपामन्त्र्य प्रविश्य गजसाह्वयम्।
स्त्रियश्च स्वपुरं यास्यन् प्रेम्णा राज्ञा निवारितः॥ ४५
उन्होंने कुन्तीसे कह दिया—‘अच्छा ठीक है’ और रथके स्थानसे वे हस्तिनापुर लौट आये। वहाँ कुन्ती और सुभद्रा आदि देवियोंसे विदा लेकर जब वे जाने लगे, तब राजा युधिष्ठिरने बड़े प्रेमसे उन्हें रोक लिया॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.8.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 118) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/8/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)