श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.6

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

याजयित्वाश्‍वमेधैस्तं त्रिभिरुत्तमकल्पकैः।

तद्यशः पावनं दिक्षु शतमन्योरिवातनोत्॥ ६

yājayitvāśvamedhaistaṃ tribhiruttamakalpakaiḥ|

tadyaśaḥ pāvanaṃ dikṣu śatamanyorivātanot|| 6

अर्थ

साथ ही युधिष्ठिरके द्वारा उत्तम सामग्रियोंसे तथा पुरोहितोंसे तीन अश्‍वमेध यज्ञ कराये। इस प्रकार युधिष्ठिरके पवित्र यशको सौ यज्ञ करनेवाले इन्द्रके यशकी तरह सब ओर फैला दिया॥ ६॥

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