श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.14

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सर्वं कालकृतं मन्ये भवतां च यदप्रियम्।

सपालो यद्वशे लोको वायोरिव घनावलिः॥ १४

sarvaṃ kālakṛtaṃ manye bhavatāṃ ca yadapriyam|

sapālo yadvaśe loko vāyoriva ghanāvaliḥ|| 14

अर्थ

जिस प्रकार बादल वायुके वशमें रहते हैं, वैसे ही लोकपालोंके सहित सारा संसार कालभगवान्‌के अधीन है। मैं समझता हूँ कि तुमलोगोंके जीवनमें ये जो अप्रिय घटनाएँ घटित हुई हैं, वे सब उन्हींकी लीला हैं॥ १४॥✎ 1575

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1575 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भीष्म-पितामहके → भीष्मपितामहके

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