श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.23

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

भक्‍त्याऽऽवेश्य मनो यस्मिन् वाचा यन्‍नाम कीर्तयन्।

त्यजन् कलेवरं योगी मुच्यते का३मकर्मभिः॥ २३

bhaktyā''veśya mano yasmin vācā yannāma kīrtayan|

tyajan kalevaraṃ yogī mucyate kāmakarmabhiḥ|| 23

अर्थ

भगवत्परायण योगी पुरुष भक्तिभावसे इनमें अपना मन लगाकर और वाणीसे इनके नामका कीर्तन करते हुए शरीरका त्याग करते हैं और कामनाओंसे तथा कर्मके बन्धनसे छूट जाते हैं॥ २३॥✎ 1576

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—सर्व०।

    (मुद्रित पृष्ठ 121)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1576 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अहंकार-रहित → अहंकाररहित

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