उस समय देवता और मनुष्य नगारे बजाने लगे। साधुस्वभावके राजा उनकी प्रशंसा करने लगे और आकाशसे पुष्पोंकी वर्षा होने लगी॥ ४५॥✎ 74
तत्र दुन्दुभयो नेदुर्देवमानववादिताः।
शशंसुः साधवो राज्ञां खात्पेतुः पुष्पवृष्टयः॥ ४५
उस समय देवता और मनुष्य नगारे बजाने लगे। साधुस्वभावके राजा उनकी प्रशंसा करने लगे और आकाशसे पुष्पोंकी वर्षा होने लगी॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.9.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 124) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/9/45/