श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.9.5

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तत्र ब्रह्मर्षयः सर्वे देवर्षयश्‍च सत्तम।

राजर्षयश्‍च तत्रासन् द्रष्टुं भरतपुङ्गवम्॥ ५

tatra brahmarṣayaḥ sarve devarṣayaśca sattama|

rājarṣayaśca tatrāsan draṣṭuṃ bharatapuṅgavam|| 5

अर्थ

शौनकजी! उसी समय भरतवंशियोंके गौरवरूप भीष्मपितामहको देखनेके लिये सभी ब्रह्मर्षि, देवर्षि और राजर्षि वहाँ आये॥ ५॥

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