श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एवं ध्यायति गोविन्द आकाशात् सूर्यवर्चसौ।

रथावुपस्थितौ सद्यः ससूतौ सपरिच्छदौ॥ ११

evaṃ dhyāyati govinda ākāśāt sūryavarcasau|

rathāvupasthitau sadyaḥ sasūtau saparicchadau|| 11

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार विचार कर ही रहे थे कि आकाशसे सूर्यके समान चमकते हुए दो रथ आ पहुँचे। उनमें युद्धकी सारी सामग्रियाँ सुसज्जित थीं और दो सारथि उन्हें हाँक रहे थे॥ ११॥

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