श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तव राम यदि श्रद्धा युध्यस्व धैर्यमुद्वह।

हित्वा वा मच्छरैश्छिन्‍नं देहं स्वर्याहि मां जहि॥ १९

tava rāma yadi śraddhā yudhyasva dhairyamudvaha|

hitvā vā maccharaiśchinnaṃ dehaṃ svaryāhi māṃ jahi|| 19

अर्थ

बलराम! यदि तेरे चित्तमें यह श्रद्धा हो कि युद्धमें मरनेपर स्वर्ग मिलता है तो तू आ, हिम्मत बाँधकर मुझसे लड़। मेरे बाणोंसे छिन्‍न-भिन्‍न हुए शरीरको यहाँ छोड़कर स्वर्गमें जा अथवा यदि तुझमें शक्ति हो तो मुझे ही मार डाल’॥ १९॥

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