बलराम! यदि तेरे चित्तमें यह श्रद्धा हो कि युद्धमें मरनेपर स्वर्ग मिलता है तो तू आ, हिम्मत बाँधकर मुझसे लड़। मेरे बाणोंसे छिन्न-भिन्न हुए शरीरको यहाँ छोड़कर स्वर्गमें जा अथवा यदि तुझमें शक्ति हो तो मुझे ही मार डाल’॥ १९॥
तव राम यदि श्रद्धा युध्यस्व धैर्यमुद्वह।
हित्वा वा मच्छरैश्छिन्नं देहं स्वर्याहि मां जहि॥ १९
बलराम! यदि तेरे चित्तमें यह श्रद्धा हो कि युद्धमें मरनेपर स्वर्ग मिलता है तो तू आ, हिम्मत बाँधकर मुझसे लड़। मेरे बाणोंसे छिन्न-भिन्न हुए शरीरको यहाँ छोड़कर स्वर्गमें जा अथवा यदि तुझमें शक्ति हो तो मुझे ही मार डाल’॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 447) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/19/