श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

बध्यमानं हतारातिं पाशैर्वारुणमानुषैः।

वारयामास गोविन्दस्तेन कार्यचिकीर्षया॥ ३२

badhyamānaṃ hatārātiṃ pāśairvāruṇamānuṣaiḥ|

vārayāmāsa govindastena kāryacikīrṣayā|| 32

अर्थ

जरासन्धने पहले बहुत-से विपक्षी नरपतियोंका वध किया था, परन्तु आज उसे बलरामजी वरुणकी फाँसी और मनुष्योंके फंदेसे बाँध रहे थे। भगवान् श्रीकृष्णने यह सोचकर कि यह छोड़ दिया जायगा तो और भी सेना इकट्ठी करके लायेगा तथा हम सहज ही पृथ्वीका भार उतार सकेंगे, बलरामजीको रोक दिया॥ ३२॥

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