श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

मुकुन्दोऽप्यक्षतबलो निस्तीर्णारिबलार्णवः।

विकीर्यमाणः कुसुमैस्त्रिदशैरनुमोदितः॥ ३६

mukundo'pyakṣatabalo nistīrṇāribalārṇavaḥ|

vikīryamāṇaḥ kusumaistridaśairanumoditaḥ|| 36

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णकी सेनामें किसीका बाल भी बाँका न हुआ और उन्होंने जरासन्धकी तेईस अक्षौहिणी सेनापर, जो समुद्रके समान थी, सहज ही विजय प्राप्त कर ली। उस समय बड़े-बड़े देवता उनपर नन्दनवनके पुष्पोंकी वर्षा और उनके इस महान् कार्यका अनुमोदन—प्रशंसा कर रहे थे॥ ३६॥✎ 1683

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1683 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मथुरा-वासी → मथुरावासी

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