श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सिक्तमार्गां हृष्टजनां पताकाभिरलंकृताम्।

निर्घुष्टां ब्रह्मघोषेण कौतुकाबद्धतोरणाम्॥ ३९

siktamārgāṃ hṛṣṭajanāṃ patākābhiralaṃkṛtām|

nirghuṣṭāṃ brahmaghoṣeṇa kautukābaddhatoraṇām|| 39

अर्थ

मथुराकी एक-एक सड़क और गलीमें छिड़काव कर दिया गया था। चारों ओर हँसते-खेलते नागरिकोंकी चहल-पहल थी। सारा नगर छोटी-छोटी झंडियों और बड़ी-बड़ी विजय-पताकाओंसे सजा दिया गया था। ब्राह्मणोंकी वेदध्वनि गूँज रही थी और सब ओर आनन्दोत्सवके सूचक बंदनवार बाँध दिये गये थे॥ ३९॥✎ 1683

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1683 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मथुरा-वासी → मथुरावासी

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