मथुराकी एक-एक सड़क और गलीमें छिड़काव कर दिया गया था। चारों ओर हँसते-खेलते नागरिकोंकी चहल-पहल थी। सारा नगर छोटी-छोटी झंडियों और बड़ी-बड़ी विजय-पताकाओंसे सजा दिया गया था। ब्राह्मणोंकी वेदध्वनि गूँज रही थी और सब ओर आनन्दोत्सवके सूचक बंदनवार बाँध दिये गये थे॥ ३९॥✎ 1683
सिक्तमार्गां हृष्टजनां पताकाभिरलंकृताम्।
निर्घुष्टां ब्रह्मघोषेण कौतुकाबद्धतोरणाम्॥ ३९
मथुराकी एक-एक सड़क और गलीमें छिड़काव कर दिया गया था। चारों ओर हँसते-खेलते नागरिकोंकी चहल-पहल थी। सारा नगर छोटी-छोटी झंडियों और बड़ी-बड़ी विजय-पताकाओंसे सजा दिया गया था। ब्राह्मणोंकी वेदध्वनि गूँज रही थी और सब ओर आनन्दोत्सवके सूचक बंदनवार बाँध दिये गये थे॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 450) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)